पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने पर गितांशु जोशी ने दिया जोर।
पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में नेपाल के जनकपुर से निकली साइकिल यात्रा पहुंची पटना, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 12 सदस्यीय दल को आवास पर किया आमंत्रित।
पटना। नेपाल के जनकपुर से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जनजागरुकता का संदेश लेकर निकली साइकिल यात्रा शनिवार को बिहार की राजधानी पटना पहुंची। पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में चल रही इस यात्रा के 12 सदस्यीय दल को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आवास पर आमंत्रित किया और सभी साइकिल यात्रियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और बिहार में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर चर्चा हुई। बैठक में बिहार में सकल पर्यावरण उत्पाद (Gross Environment Product—GEP) लागू करने का सुझाव भी दिया गया।
बाढ़ के पानी का सदुपयोग जरुरी: डॉ. अनिल प्रकाश जोशी —
पत्रकारों से बातचीत में पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि बिहार में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को अवसर में बदलने की संभावनाएं मौजूद हैं। कई क्षेत्रों में बाढ़ के पानी का उपयोग मत्स्य पालन, मखाने की खेती और सिंचाई के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस नीतिगत पहल जरुरी: गितांशु जोशी —
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व संगठन मंत्री एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष गितांशु जोशी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति को बचाने का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन, आर्थिक विकास और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का सवाल है।
उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं। बिहार में भी इन समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस नीतिगत पहल आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं बनाते समय पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जल संरक्षण, नदियों और तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सरकारी योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

पर्यावरण संरक्षण में युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका अहम —
गितांशु जोशी ने जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की है। युवाओं और विद्यार्थियों को इस दिशा में आगे आकर जनजागरुकता बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए और विकास के आकलन में पर्यावरण संरक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर हासिल किया गया विकास स्थायी नहीं हो सकता। आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देना समय की सबसे बड़ी जरुरत है।
बिहार में सकल पर्यावरण उत्पाद (GEP) लागू करने का सुझाव —
बैठक में बिहार में सकल पर्यावरण उत्पाद (GEP) लागू करने का सुझाव दिया गया। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास के साथ जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता जैसे प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति को भी विकास के आकलन में शामिल करना है। इससे पर्यावरण संरक्षण को सरकारी नीतियों और विकास योजनाओं में अधिक प्रभावी ढंग से स्थान मिल सकेगा।
प्रकृति का संरक्षण ही सतत विकास और सुरक्षित भविष्य का आधार —
नेपाल के जनकपुर से शुरु हुई यह साइकिल यात्रा विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्रकृति के साथ संतुलित विकास का संदेश दे रही है। पटना में मुख्यमंत्री के साथ हुई मुलाकात और पत्रकारों से संवाद के माध्यम से यात्रा ने यह संदेश दिया कि प्रकृति का संरक्षण ही सतत विकास और सुरक्षित भविष्य का आधार है।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल






