‘कुमाऊं का द्वार’ कहे जाने वाले शहर के निजी अस्पतालों पर उठे सवाल, लापरवाही के मामलों पर सघन जाँच की मांग।

शुभानु आई हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद श्रमिक की मौत, परिजनों का हंगामा; पहले भी चंदन अस्पताल में सामने आ चुके हैं ऐसे मामले।

हल्द्वानी (नैनीताल)। ‘कुमाऊं का द्वार’ कहे जाने वाले हल्द्वानी में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भोटिया पड़ाव क्षेत्र स्थित शुभानु आई हॉस्पिटल में आँख के ऑपरेशन के बाद एक श्रमिक की मौत का मामला सामने आने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और संबंधित डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। साथ ही इस तरह की घटनाओं को देखते हुए लोगों ने अस्पतालों की सघन जाँच की मांग भी उठाई है।

जानकारी के अनुसार ग्राम जरसा गांजा पोस्ट ऑफिस चिल्किया रामनगर निवासी राजेश ने कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके भाई राजपाल को 28 मार्च 2026 को पत्थर तोड़ते समय आँख में कंकड़ लग गया था, जिसके बाद उन्हें हल्द्वानी के भोटिया पड़ाव क्षेत्र स्थित शुभानु आई हॉस्पिटल में दिखाया गया। चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी और कहा कि यदि सर्जरी नहीं कराई गई तो आँख खराब हो सकती है। परिजनों के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर पहली सर्जरी कराई गई, जिसके बाद दवाइयों के साथ लगातार जाँच चलती रही। बाद में दोबारा ऑपरेशन की सलाह दी गई। तहरीर में कहा कि बीती 15 अप्रैल 2026 की शाम से रात करीब पौने दस बजे तक सर्जरी की गई।

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने मरीज का ब्लड प्रेशर हाई होने की बात कही। स्थिति गंभीर होने पर मरीज को ठंडी सड़क स्थित दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण राजपाल की जान चली गई।

राजपाल की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को बमुश्किल शांत कराया। इसके बाद सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर परिजन कोतवाली पहुंचे और कोतवाल विजय मेहता का घेराव किया। साथ ही मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने और संबंधित डॉक्टर को हिरासत में लेकर कार्रवाई करने की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी शहर के चंदन अस्पताल में इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, और अब शुभानु आई हॉस्पिटल का मामला सामने आने के बाद निजी अस्पतालों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि अस्पतालों की लापरवाही के चलते आम लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस मामले में राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु ने भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की अनदेखी के कारण लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि मृतक के परिजनों की ओर से तहरीर मिली है और मामले की जाँच शुरु कर दी गई है।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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