एलटी समायोजित शिक्षकों ने सीएम धामी को सौंपा ज्ञापन, चयन प्रोन्नत वेतनमान में बेसिक सेवा जोड़ने की मांग।

अल्मोड़ा। बेसिक से एलटी में समायोजित शिक्षकों के एक शिष्टमण्डल ने चयन प्रोन्नत वेतनमान में बेसिक की सेवा जोड़ने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पुष्प गुच्छ भेंट कर ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने इस मामले में सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

राजकीय एल.टी. समायोजित/पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच के अध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया के नेतृत्व में आज बुधवार को टाटिक हेलीपैड में एक शिष्टमण्डल ने मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड अधीनस्थ शिक्षा (स्नातक प्रशिक्षण श्रेणी) सेवानियमावली 2014 से अविधिक प्रावधान हटाए जाने संबंधी ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखण्ड अधीनस्थ शिक्षा (स्नातक प्रशिक्षण श्रेणी) सेवानियमावली 2006 के नियम 5 के अंतर्गत 70 प्रतिशत पदों को सीधी भर्ती से भरा जाना था, जबकि शेष 25 प्रतिशत पदों को राजकीय प्रारम्भिक शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय, सहायक अध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं सहायक अध्यापक राजकीय आदर्श विद्यालय से समायोजन द्वारा तथा 5 प्रतिशत पदों को लिखित परीक्षा के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान था।

शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2014 में इस नियम में संशोधन करते हुए 70 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत, 25 प्रतिशत के स्थान पर 30 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत कर दिया गया। साथ ही “समायोजन” शब्द के स्थान पर “पदोन्नत” शब्द स्थापित कर दिया गया। इसके परिणामस्वरुप प्रभावित शिक्षकों को चयन प्रोन्नत वेतनमान हेतु पूर्व की सेवा अवधि जोड़ने से वंचित कर दिया गया।

शिक्षक संघर्ष मंच ने आरोप लगाया कि शिक्षकों को विश्वास में लिए बिना गुपचुप तरीके से किए गए इस संशोधन के खिलाफ प्रभावित शिक्षक पिछले 12 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। मंच के अनुसार विभाग ने अंततः इस त्रुटि को सैद्धांतिक रुप से स्वीकार करते हुए 25 जून 2024 को नियम संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसके बाद शासन द्वारा 13 सितम्बर 2024 को की गई प्रेच्छा के अनुपालन में निदेशक, माध्यमिक शिक्षा ने 10 अक्टूबर 2024 को “पदोन्नत” के स्थान पर पुनः “समायोजन” शब्द रखे जाने का संशोधित प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया।

ज्ञापन के साथ डेढ़ वर्ष से शासन स्तर पर विचाराधीन सेवानियमावली संशोधन प्रस्ताव तथा इस मांग के समर्थन में विधानसभा अध्यक्ष सहित कुल 29 विधायक एवं सांसदों द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए समर्थन पत्र भी संलग्न किए गए।

शिक्षक संघर्ष मंच ने कहा कि 12 वर्षों से इस मामले में अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है, जिससे प्रभावित शिक्षकों में गहरी नाराजगी है। मंच ने कहा कि किसी भी आंदोलनात्मक कदम से पहले उन्होंने न्याय की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है।

शिष्टमण्डल में मंच के अध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया, भगवत बगडवाल, जितेन्द्र पुनेठा, मनोज कुमार पाठक एवं मुक्ता बिष्ट शामिल रहे।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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