विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि, विस्थापित परिवारों के संघर्ष और पीड़ा को किया स्मरण।
हल्द्वानी (नैनीताल)। राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर, गौलापार में भारत विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले असंख्य नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने तथा विस्थापित परिवारों के संघर्ष, पीड़ा और त्याग को स्मरण करने के उद्देश्य से “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं जनसामान्य को विभाजन की त्रासदी से अवगत कराते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं अखंडता के प्रति जागरुकता बढ़ाना तथा विश्व शांति एवं मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि इतिहास की पीड़ादायक घटनाओं को स्मरण करने का उद्देश्य किसी प्रकार की कटुता को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर भविष्य में मानवता, शांति और भाईचारे को मजबूत करना है।
विभाजन की त्रासदी पर दिखाया आधारित वृत्तचित्र:
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यार्थियों को भारत विभाजन की पृष्ठभूमि एवं उससे जुड़ी मानवीय त्रासदी पर आधारित एक वृत्तचित्र दिखाया गया। वृत्तचित्र के माध्यम से विद्यार्थियों ने विभाजन के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों, बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन तथा आम नागरिकों द्वारा झेली गई कठिनाइयों को समझने का प्रयास किया।
इतिहास विभाग ने विभाजन की पृष्ठभूमि पर डाला प्रकाश:
तत्पश्चात इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. महिराज मेहरा ने भारत विभाजन के विभिन्न कारणों एवं तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाजन केवल राजनीतिक सीमाओं के पुनर्निर्धारण की घटना नहीं थी, बल्कि इसके परिणामस्वरुप लाखों लोगों को अपना घर, जमीन-जायदाद और अपनी जड़ें छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। उन्होंने विस्थापित परिवारों द्वारा झेले गए दुःख, पीड़ा, संघर्ष और अनिश्चितता के विभिन्न पहलुओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
विभाजन के मानवीय पक्ष को समझने का किया आह्वान:
वाणिज्य विभाग के प्राध्यापक डॉ. बसन्त नेगी ने विद्यार्थियों को विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की एक घटना के रुप में न देखने, बल्कि उसके मानवीय पक्ष को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विभाजन से संबंधित पुस्तकों, संस्मरणों, साहित्य एवं चलचित्रों का अध्ययन कर उस दौर के लोगों के अनुभवों और पीड़ा को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास को संवेदनशीलता के साथ पढ़ने तथा अतीत की घटनाओं से सीख लेकर वर्तमान में सामाजिक सद्भाव एवं भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया।
मानवता, शांति और भाईचारे का दिया संदेश:
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ. भुवन मठपाल ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इतिहास की स्मृतियां हमें यह याद दिलाती हैं कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं और शांति से बड़ी कोई उपलब्धि नहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को आपसी प्रेम, सद्भाव, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।
दो मिनट का मौन रखकर दी भावभीनी श्रद्धांजलि:
कार्यक्रम के अंत में भारत विभाजन के दौरान दिवंगत हुए असंख्य नागरिकों तथा विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों की स्मृति में दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, अखंडता और विश्व शांति के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भारत के इतिहास के एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील अध्याय से परिचित कराने के साथ-साथ मानवीय संवेदना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के महत्व का संदेश भी दिया।
उक्त कार्यक्रम में प्रभारी प्राचार्य प्रो. कैलाश कलौनी, वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. भारती बहुगुणा, डॉ. प्रकाश मठपाल, डॉ. हेमंत बिनवाल समेत महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अंशुमन शाह समेत समस्त कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल











