समय पर उपचार न मिलने से पूर्व ग्राम प्रधान की मौत, अस्पतालों की लचर व्यवस्था पर उठे सवाल।
जिलाधिकारी ने रेफर किए जाने के मामले की जाँच के दिए निर्देश, परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का लगाया आरोप।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की हकीकत बीते सोमवार रात भतरौंजखान में उस समय सामने आ गई, जब समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने से 42 वर्षीय पूर्व ग्राम प्रधान गणेश गिरी की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि जिले के अस्पतालों में समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने रेफर किए जाने की प्रक्रिया की जाँच के निर्देश दिए हैं।
मृतक के भाई प्रदीप गोस्वामी, चाचा वीरेंद्र गोस्वामी, पूरन गोस्वामी तथा भतीजे शिवेंद्र गोस्वामी ने बताया कि भौनली निवासी पूर्व ग्राम प्रधान गणेश गिरी दीवार से अचानक गिरकर गंभीर रुप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। रात करीब 11 बजे परिजन उन्हें उपचार के लिए भतरौंजखान अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल में ताला लटका मिला। उनका आरोप है कि अस्पताल में कोई चिकित्साकर्मी मौजूद नहीं था तथा अस्पताल का इमरजेंसी नंबर भी काम नहीं कर रहा था।
परिजनों के अनुसार शोर मचाने पर एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा और कुछ देर बाद चिकित्साधिकारी अस्पताल पहुंचे। उनका आरोप है कि उपचार शुरु करने के बजाय पहले पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद भतरौंजखान अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. करन ने घायल का प्राथमिक उपचार कर उन्हें 40 किलोमीटर दूर उप जिला चिकित्सालय रानीखेत रेफर कर दिया। रानीखेत में चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें बेस अस्पताल अल्मोड़ा भेज दिया। सुबह करीब 5:30 बजे बेस अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस दर्दनाक घटना पर भौनली के ग्राम प्रधान जगत राम, ब्रिजेश सती, जगदीश पांडे, अशोक सती, किशोर हरबोला सहित अन्य ग्रामीणों ने अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में न चिकित्सक समय पर मिले, न आपातकालीन व्यवस्था काम आई और न ही प्राथमिक उपचार सही तरीके से मिला। उनका कहना है कि यदि दोनों अस्पतालों में समय पर समुचित उपचार मिलता तो जान बच सकती थी।
जिलाधिकारी ने दिए जाँच के निर्देश:
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि अस्पतालों से मरीज को रेफर किया जाना गंभीर मामला है। इसकी पूरी जाँच कराई जाएगी। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को मामले की जाँच के निर्देश दे दिए हैं।
सीएमओ का पक्ष:
मुख्य चिकित्साधिकारी अल्मोड़ा डॉ. एच.सी. पंत ने कहा कि भतरौंजखान अस्पताल में चिकित्साधिकारी मौजूद थे। मरीज को जो भी उचित उपचार मिलना था, वह दिया गया। इसके बाद आवश्यकतानुसार उन्हें रेफर किया गया।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल










