राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर में महिला अधिकारों के प्रति जागरुकता पर संगोष्ठी आयोजित।
हल्द्वानी (नैनीताल)। राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर, गौलापार में महिला उत्पीड़न निवारण समिति के तत्वावधान में “महिला अधिकारों के प्रति जागरुकता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों, महिला सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों तथा लैंगिक समानता के प्रति जागरुक करना रहा।
छात्राओं ने महिला अधिकारों के प्रति जागरुक रहने का दिया संदेश:
कार्यक्रम में बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा मंजू रुवाली ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरुक रहते हुए किसी भी प्रकार के उत्पीड़न अथवा भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए।
इसके बाद बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा लक्ष्मी जोशी ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों और कानूनों की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि वे अन्याय के विरुद्ध प्रभावी ढंग से आवाज उठा सकें।
डॉ. रीमा आर्या ने महिला अधिकारों और चुनौतियों पर डाला प्रकाश:
इसके पश्चात महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ. रीमा आर्या ने महिला अधिकारों की आवश्यकता एवं वर्तमान समय में महिलाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी होना आवश्यक है। जागरुकता ही महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रभावी उपयोग तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के विरुद्ध उचित कदम उठाने में सक्षम बनाती है। उन्होंने छात्राओं से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने तथा किसी भी असहज अथवा अनुचित स्थिति में चुप न रहने का आह्वान किया।
महिला सशक्तीकरण में अधिकारों की जानकारी के साथ समान भागीदारी जरुरी:
कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. भारती बहुगुणा ने महिला अधिकारों एवं लैंगिक समानता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल अधिकारों की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपने निर्णय स्वयं लेने, शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने और सामाजिक स्तर पर समान भागीदारी सुनिश्चित करने से जुड़ा विषय है। उन्होंने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरुक रहते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उच्च शिक्षा में महिला अधिकारों की जागरुकता को बताया महत्वपूर्ण:
कार्यक्रम में प्रभारी निदेशक उच्च शिक्षा, प्रो. आनंद सिंह उनियाल ने अपने संबोधन में महिला अधिकारों की जागरुकता को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का संस्थान नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने छात्राओं से अपने अधिकारों एवं उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी प्राप्त कर आत्मनिर्भर एवं जागरुक नागरिक बनने का आह्वान किया।
महिला सम्मान और सुरक्षा को बताया सामूहिक जिम्मेदारी:
कार्यक्रम के अंत में प्रभारी प्राचार्य प्रो. कैलाश कलौनी ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला सम्मान और सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में छात्राओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं सकारात्मक वातावरण बनाए रखना महाविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने छात्राओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरुक रहने तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित समिति एवं महाविद्यालय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल






